हकीगत
उम्मीदों के हौसले बंधाकर...
ढ़लना तूझे भी है,
और
ढ़लना मुझे भी है!
खुशियों की रोशनीयां उधेड़कर ...
बिखरना तुझे भी है,
और
बिखरना मुझे भी है!
कल,
फिर से लौटने के लिए...
आज छुपना तुझे भी है,
और
फिर ना लौटने हमेशा के लिए...
एक दिन छुपना मुझे भी है!
k. यश


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झिंदाबाद!