पेंढरी (नवरगांव) मे चलता है सापों का जहर उतारने वाले नागमोतीयों का जानलेवा नाटक
पेंढरी (नवरगांव) मे चलता है सापों का जहर उतारने वाले नागमोतीयों का जानलेवा नाटक
'अंधश्रद्धा निर्मुलन समिति को लोगों का आवाहन'
तलोधी (यश कायकर)
नवरगांव के नजदीकी पेंढरी गांव में बरसों से सापों के काटने पर मंत्रोच्चार द्वारा सापों का जहर ऊतारने का 'जानलेवा' गोरखधंधा चल रहा है. और आएदिन ईस अंधश्रद्धा मे कोई न कोई अपनी जान गवाता जा रहा हैं.अभी बरसात के मौसम में सर्पदंश का प्रमाण अधिक होता है. जिससे ईस गांव में आए दिन सर्पदंश से पीड़ित लोगों का जमावड़ा लगा रहता है. उसमें से कुछ लोग अच्छे होकर वापस जाते हैं तो कुछ लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ रही है . जिससे सचमुच में इनके मंत्र उपचार से सर्पदंश के पीड़ित दुरुस्त होते हैं क्या यह सवाल लोग पूछ रहे हैं. और कुछ समझदार लोग अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति को इस और ध्यान देकर लोगों की जाने बचाने की अपील कर रहे हैं. इस संदर्भ में अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के नागभीड तालुका सचिव और वन्यजीव प्रेमी यशवंत कायरकर से बात करने पर उन्होंने इस संदर्भ मे बताया कि महाराष्ट्र में सैकड़ों प्रजाति के सांप मौजूद है उनमें से मात्र 7 प्रजाति ही विषैली है और कुछ नीम विषैली और बाकी सारे बिन विषैले साप है . उन सात विषैली 7 प्रजातियों में मन्यार, घोनस, नाग, फुरसे, चापड़ा, और नागराज है.उनमेसे सिर्फ 4 प्रजाति के मन्यार,घोनस,नाग, फुरसे यहीं विषैले साप अपने इलाके में पाए जाते हैं.इन विषैले सापोंद्वारा काटने पर इंसान की बिना औषध उपचार के मौत हो जाती है. और इनसे मिलते-जुलते बिन विषैले और नीम विषैले ले सांप भी परिसर में मौजूद है. जिनके काटने पर इंसानी जान बच जाती है. उदाहरण के तौर पर नाग (कोबरा) जैसे दिखने वाले दूर नागिन धामन और दिवट साप है. वही घोणस और फुरसे जैसे दिखने वाले डुरक्या घोनस, मांजर्या साप, और अजगर हैं. तो वहीँ मन्यार जैसे दिखने वाले कुकरी , कावड्या,जैसे साप हैं. जिनमें आम इंसान फर्क नहीं कर पाता और यह बिन विषैले साप काटने पर इंसानी मौतें नहीं होती. और आदमी की जान बच जाती है. मगर लोग यही समझते हैं कि हमें विषैले सांप ने काटा और मात्रिक के मंत्रोच्चार से हमारी जान बच गई. मगर वास्तविकता में कोई भी जहरीला सांप काटने पर उसके जहर के एंटी डोज के बिना जान बचाना नामुमकिन है. और किसी भी शासकीय रुग्णालय में हर विषैले सांप की जहर से बनी एंटी डोज मौजूद होती है. जहां पर सांप काटने के बाद पेशेंट को पहुंचाने पर उसकी जान बचाई जा सकती है.फिर भी सच में जहरीले सांप ने काटने पर लोगों को इन अंधश्रद्धा में अपनी जान गंवानी पड़ रही है. इसलिए लोगों ने इन बुआ बाबाओं के पास जाकर अपनी जान जोखिम में डालने या गवानी नहीं चाहिए ऐसा उनका कहना है.
मगर परिसर के लोग और इन बुआ बाबाओं के कुछ एजेंट्स सांप काटने के बाद पेशेंट को इसी पेंड्री गांव में नियोजित ठिकान पर लेकर आते हैं और उन पर मंत्र उपचार करते हैं जिसमें अक्सर बहुत से लोगों ने अपनी जान गवाई है तो इसी परिसर के कुछ सुशिक्षित और समझदार लोगों द्वारा अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति ने इस और ध्यान देंने का आवाहन कीया हैं.



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