गोसीखुर्द - उपोषण करेगे किसान
तलोधी (बा.)21 फरवरी को आयोजित पत्रकार परिषद में गोसेखुर्द नहर में अधिग्रहित खेतों के किसानों ने सरकार ग्रामीण और शहरी का भेदभाव कर ज्यादा लोकसंख्या वाले गांव के किसानों को 26 से 28 लाख रुपए प्रति हेक्टर और छोटे गांव की किसानों को मात्र एक 2लाख 40हजार रुपए प्रति हेक्टर मुआवजा देकर बडे गांव वाले किसानों से 10 गुना कम मुआवजा देकर भेदभाव और अन्याय कर रही है . हमारा इस परियोजना को कोई विरोध नहीं है हमें शासकीय नियमानुसार एक समान मुआवजा दिया जाए. हम इस परियोजना के लिए खेती देने के लिए तैयार है. ऐसी इस पत्रकार परिषद में गोसेखुर्द नहर संघर्ष समिति की ओर से मांग की गई. इस परिसर के किसानोंकी 30 हेक्टर जमीन इस परियोजना के लिए अधिग्रहन क्षेत्र है. ज्ञात हो कि 2009 /10 में सरकार द्वारा सभी किसानों को नहर के लिए अधिग्रहित जमीन के लिए एक समान मूल्य पर (4लाख ₹ प्रति एकड़) 11 लाख ₹ 25हजार ₹ प्रति हैक्टर के समान दर से मुआवजा दिया था मगर अभी 10 साल बाद 13 अगस्त 2018 को जाहिर नए परिपत्रक में उसके उलट कारण बता कर एक समानमुल्य देने की बात की गई मगर वास्तविकता में किसानों के साथ सौतेला पन का व्यवहार और अन्याय किया जा रहा है. और इस इलाके बड़े बड़े गांव शासन द्वारा 'प्रभावक्षेत्र' घोषित किए गए हैं जिनमें तालोधी, पाथरी, नवरगांव,सांवली,भिसी, जैसे बड़े गांव है जिनको मुआवजे के तौर पर 26 लाख ₹ से 28 लाख रुपए प्रति हेक्टर मुआवजा दिया जा रहा है और उन्हीं खेतों से लगकर जो छोटे गांव के किसान है जिनमें लखमापुर, गिरगांव, वाढोना, गंगा सागर हेटी, उश्राडा मेंढा, आवडगांव जिवनापुर, आकापुर, झाडबोरी डोंगरगांव, चारगांव, ओवाड़ा जैसे छोटे गांवों के किसानों को मात्र 2लाख ₹ से 4लाख ₹तक का ही मुआवजा मिल रहा है और यह अन्याय है. किस आधार पर इन बड़े गांव को प्रभाव क्षेत्र घोषित किया गया है? यह सवाल भी पीड़ित किसानों द्वारा पूछा गया. हमें सिर्फ समान भाव से मुआवजा चाहिए. हम सरकार से बातचीत कर परियोजना के लिए खेती देने को तैयार है मगर हम से बातचीत किए बिना. हमें नोटिस भेजकर कर कलम 19/1 के अनुसार जबरदस्ती जमीन अधिग्रहण करने की चेतावनी दी गई है और उसके लिए सिर्फ 7 दिनों का अवधी दिया गया है. इस बारे में एस.डी. एम. से मुलाकात की गई मगर उनका रवैया भी एकदम हिटलर जैसा ही था. और उलट हम पर ही कार्रवाई करने की धमकी एस.डी.एम.द्वारा दी गई. ऐसा किसानों का कहना है इस अन्याय के बारे में 5 जुलाई 2018 को खासदार, कलेक्टर और किसानों ने मिलकर चर्चा की थी. उसके बाद 19 दिसंबर 2018 को महसूल मंत्री चंद्रकांत पाटील से भी हमारा शिष्टमंडल मिलने गया था और उनके द्वारा एक समान मूल्य देने का आश्वासन दिया गया था. पर अभी तक सौतेला व्यवहार कर हम किसानों को ठगा जा रहा है और अभी 25 फरवरी को जिलाधिकारी से बैठक करने के बाद नई रणनीति तैयार की जाएगी और फिर समस्या का समाधान नहीं मिलता तो इस अन्याय के खिलाफ धरने आंदोलन , निवडणूक बहिष्कार और परिवार के साथ उपोषण तक करने की चेतावनी इस परिषद में संघर्ष समिति द्वारा दी गई है. 'इस परियोजना में अधिग्रहीत कुछ जमीने नहर में आती ही नहीं और कुछ किसानों को जो जमीन शासन द्वारा पट्टों पर मिली थी उनको भी लाभ पहुंचाकर बड़ी धांधली होने का आरोप भी लगाया गया.' पहले से ही इस परिसर के कुछ गांव देलनवाली,पलसगांव, चारगांव,खातगांव, भेडाला, डोंगरगांव जहां किसानों को सिर्फ 8 घंटा खुशी पंप के लिए लाइट दी जाती है और वह भी रात को 12:00 बजे से सुबह 8:00 बजे तक ही लाइट रहती है तो इस परिसर के किसान जहां जंगली जानवरों की परेशानी है वाह किस तरह से किसान खेती करेंगे यह भी सवाल किया गया. इस समस्यापर भी शासन ध्यान दें. इस पत्रकार परिषद में विकास घोनमोड़े वाढोना, जीवन बोरकर उश्राडा मेंढा, वासुदेव गहाने आवड़गांव, दादाजी निकुरे जीवनापुर, अशोक गायकवाड गिरगांव, गंगाधर डोंगरवार हेटी, सुनील सोनवाने गिरगांव, जगदीश कापगते हेटी, मनोहर सहारे नवरगांव, दादाजी अगड़े डोंगरगांव, कवडू हंडेकर डोंगरगांव, प्रभाकर निकूरे टोला, दिलीप सोनवाने देलनवाली, विश्वनाथ झोड़े देलनवाडी, पुरुषोत्तम बोरकर गिरगांव, जैराम गायकवाड गिरगांव, उपस्थित थे
✍🏻 यश कायरकर


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