यमदूत बनके दौड़ रहे हैं रास्तों पर बिना नंबर प्लेट के टिप्पर. आर.टी.ओ. और ट्राफिक पुलिस की अनदेखी या मिलीभगत.?



तळोधी बा (यश कायरकर)
    नागपुर - उमरेड - नागभीड - मूल -चंद्रपुर हाईवे पर फर्राटे से और मौत का यमदूत बनके आए दिन किसी ना किसी को कुचलते हुए, और स्थानिक पुलिस और लोगों की आंखों में धूल झोंक कर दौड़ रहे यह मौत के यमदूत। अक्सर यह रेत या गिट्टी से भरे हुए और क्षमता से अधिक भरे हुए यह टिप्पर, ट्रक रेती की तस्करी करके जल्दी से जल्दी दो फेरीया मारने के चक्कर में लोगों को कुचलते हुए इस रास्ते से दौड़ते हुए अक्सर देखे जा रहे हैं।  मगर कोई आंखों से इन्हें किसी को कुचल कर भागते हुए देख भी ले तो भी ईन ट्रक/टिप्परों के पीछे नंबर प्लेट ना होना या फिर नंबर प्लेट पर ग्रीस लगाकर उसे मिटाया हुए होने की वजह से पुलिस भी पकड़ नहीं पाती है।
    कुछ दिन पूर्व सावरगांव निवासी युवक कैलाश गेडाम  (३५) को रास्ता पार करते वक्त एक पीले रंग के नागपुर से सिंदेवाही की तरफ जा रहे हैं टिप्पर ने सावरगांव के बस स्टॉप पर ही कुचल दिया और सिंदेवाही की तरफ भाग गया । वहां मौजूद लोगों ने आंखों से  उस टिप्पर को देखा था मगर पुलिस उसको पकड़ने में नाकामयाब रही। और सावरगांव के लोगों ने रात को तिन घंटे तक रास्ता जाम कर के रखा था । और फरार टिप्पर को पकड़ने की मांग करती रही। आनन-फानन में लोगों को समझा-बुझाकर माहौल शांत किया गया। 


     मगर आए दिन इस तरह की वारदातें भिवापुर - मोहाडी- नागभीड  - सावरगांव - तलोधी- सिंदेवाही  इस रास्ते पर देखने को मिल रही है।  मगर स्थानीय पोलीस इन मौत के यमदूत बनकर दौड़ रहे और लोगों को कुचलकर मिस्टर इंडिया की तरह गायब हो रहे इन टिप्पर/ट्रकों को पकड़ने में नाकामयाब साबित हो रही है । और इसकी एक ही वजह है जो है इन टिप्पर/ ट्रकों के पीछे लिखे नंबर प्लेट ना होना या फिर इन नंबर प्लेट पर ग्रीस से पुताई कर नंबर मिटाया जाना।
    
नागपुर - उमरेड  - भिवापुर - नीलज-  नागभीड - सिंदेवाही करीब डेढ़ सौ किलोमीटर के इस सफर में इस हाईवे पर जगह जगह पर आरटीओ ,  ट्राफिक पुलिस तैनात रहते हैं फिर भी रोज ही इस रास्ते पर दौड़ते 100 में से 80-90 ट्रकों पर टिप्पर पीछे की तरफ नंबर प्लेट नहीं होना या फिर नंबर प्लेट मिटायी हुई होना या फिर इस रास्ते पर कई ऐसे टिप्पर देखे गए हैं जहां आगे की नंबर प्लेट अलग और पीछे की नंबर प्लेट अलग है।  फिर भी इन आर. टी. ओ. चौकीयों की आंखों में धूल झोंक कर रोज ही इस तरह के बिना नंबर प्लेट वाले शेकडो ट्रक रात दिन धड़ल्ले से किस तरह से चल पा रहे हैं ? यह भी सभी लोगों में कुतूहल का विषय और चर्चा का विषय बना हुआ है । 


       जहां एक तरफ कोई अपनी फैमिली कार से नागपुर जाता है तो नागपुर पुलिस जो कि उमरेड के बीच में  हायवे  पर कहीं खड़ी रहती है वह सिर्फ फैमिली कार की नंबर प्लेट फैंसी होने की वजह से 1000(एक हजार ) - ₹2000 (दो हजार)का जुर्माना वसूल ती है , या फिर कोई बाइक सवार इन रास्तों से गुजरता है तो नंबर प्लेट बराबर ना होने की वजह से उनसे भी पैसा वसूलते हैं। वह इन  रोज ही इस रास्ते पर दौड़ते शेकडो ट्रकों , टिप्परोंके नंबर प्लेट ना होने पर  आर.टी.ओ, ट्राफिक पुलिस आंखें मूंद के क्यों चुपचाप रहती है ? और इन रास्तों पर किस तरह धड़ल्ले से दौड़ते हैं ? यह भी इन आर.टी.ओ. , ट्राफिक पुलिस और उनकी निष्ठा के प्रति बहुत बड़ा प्रश्न चिन्ह निर्माण करते हैं । 


          जब ऐसे कोई टिप्पर किसी को कुचल के भाग जाते हैं तो कोई इनका नंबर नहीं देख पाता । या फिर गलत नंबर होता है जिस वजह से स्थानिक पुलिस को उन हादसों में लिप्त ट्रकों को पकड़ने में काफी दिक्कत होती है । और फिर जिस वजह से रास्ते पर  कुचल के मरने वाले आम आदमी या फिर कोई गरीब आदमी का परिवार किसी भी आर्थिक सहायता के बिना भी बर्बाद हो जाता है । प्रशासन या फिर स्थानिक पुलिस को भी अब आर.टी.ओ. और तस्करी करने वाले बिना नंबर प्लेट वाले ट्रकों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। 
अन्यथा कहीं ऐसा ना हो की लोगों के सब्र और सहनशीलता की हद टूट जाए और इन मौत के यमदूत को रास्तोंपर लोगों को कुचल कर भागने से रोकने के लिए खुद रास्तों पर उतर कर बहुत बड़ा आंदोलन छेड़ना ना पड़ जाए।

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झिंदाबाद!